सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद सक्रिय हुआ शिक्षा विभाग, स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में होगा उत्तराखंड राज्य गीत का अनिवार्य गायन, आदेश जारी
देहरादून: हेमंत बिष्ट द्वारा रचित ‘उत्तराखंड देवभूमि, मातृभूमि, शत-शत वंदन अभिनंदन’ गीत की, जिसे वर्ष 2016 में उत्तराखंड के राज्य गीत का दर्जा दिया गया था। दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार में लागू हुए इस गीत की धुन कुछ समय तक तो जमकर सुनाई दी परंतु सरकार बदलने और समय बीतने के साथ कई सरकारी योजनाओं की तरह राज्य गीत भी धरातल से गायब हो गया।
लंबे समय से सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में इसके सीमित उपयोग को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच अब उधम सिंह नगर का शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। पंतनगर के भंडारी कॉलोनी निवासी हिमांशु पपनै की ओर से सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत के बाद विभाग ने राज्य गीत के अनिवार्य गायन को लेकर कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।
शिकायत में उठी सांस्कृतिक अस्मिता की चिंता
आपको बता दें कि हिमांशु पपनै ने अपनी शिकायत के माध्यम से कहा कि पूर्व सरकार ने राज्य की विरासत को सहेजने के उद्देश्य से राज्य गीत को आधिकारिक मान्यता दी थी। उनका कहना था कि यह गीत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की “पहचान, गौरव और सांस्कृतिक चेतना” का वाहक है। लेकिन हाल के वर्षों में विद्यालयों और सरकारी मंचों पर इसका गायन लगभग ना के बराबर रह गया है, जिससे राज्य गीत का महत्व धीरे-धीरे कम होता नजर आ रहा है। इसी चिंता को देखते हुए उन्होंने इसके नियमित गायन को पुनः सुनिश्चित करने की मांग CM हेल्पलाइन में की गई अपनी शिकायत में उठाई।

सवाल भी उठे—इतने वर्षों तक पालन क्यों नहीं हुआ?
हालांकि शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी होने के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि जिस राज्य गीत को कई वर्ष पहले आधिकारिक दर्जा मिल चुका था, उसके नियमित गायन को लेकर प्रभावी निगरानी अब तक क्यों नहीं की गई? कई शिक्षकों का मानना है कि स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी और विभागीय फॉलो-अप न होने के कारण राज्य गीत को वह स्थान नहीं मिल सका जिसकी अपेक्षा की गई थी।

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